आम आदमी का सस्ता डीजल गटक रहीं बड़ी कंपनियां! सरकार ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

मुख्य बातें
- •उद्योग बल्क डीजल की तुलना में सस्ते रिटेल डीजल का गलत फायदा उठा रहे हैं, जिससे सरकारी कंपनियों को रोजाना 550 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
- •दिल्ली में रिटेल डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि बल्क डीजल 149 रुपये प्रति लीटर है, जिससे 54 रुपये प्रति लीटर का अंतर है।
- •केंद्र सरकार ने राज्यों को विशेष टीमें बनाकर पेट्रोल पंपों की निगरानी करने और कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
- •सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार है, इसलिए आम लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
देश में वर्तमान में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता, किसानों और नौकरीपेशा वर्ग पर ईंधन की बढ़ती लागत का अतिरिक्त बोझ कम करना है। हालांकि, इस व्यवस्था का फायदा उठाकर बड़े उद्योग थोक सप्लाई (बल्क) के बजाय सीधे रिटेल पेट्रोल पंपों से सस्ता डीजल खरीद रहे हैं। इससे न केवल सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कमी का खतरा भी बढ़ गया है।
इस पूरे मामले की मुख्य वजह डीजल की कीमतों में मौजूद भारी अंतर है। 28 मई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में आम लोगों के लिए रिटेल डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि उद्योगों के लिए बल्क डीजल की कीमत 149 रुपये प्रति लीटर है। इस प्रकार, प्रति लीटर 54 रुपये का अंतर है, जिसका फायदा उठाकर उद्योग बल्क आपूर्ति छोड़कर रिटेल पंपों से डीजल खरीद रहे हैं। दरअसल, उद्योगों के लिए ईंधन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से तय होती है, जबकि आम जनता को राहत देने के लिए रिटेल कीमत सरकार द्वारा नियंत्रित की जाती है। इसी अंतर का गलत फायदा उठाकर उद्योग अपना बल्क कोटा छोड़कर रिटेल पंपों का रुख कर रहे हैं।






