ऊर्जा संक्रमण को गति देने के लिए सरकार ने हाइड्रोजन और सीएनजी-एलपीजी-एलएनजी फ्यूल पंपों की जांच व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया

मुख्य बातें
- •केंद्र सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों में संशोधन कर हाइड्रोजन, सीएनजी, एलपीजी और एलएनजी फ्यूल डिस्पेंसरों की सरकारी जांच को मंजूरी दी है।
- •सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (जीएटीसी) द्वारा अब 23 प्रकार के उपकरणों की जांच संभव, पहले यह संख्या 18 थी।
- •पेट्रोल-डीजल डिस्पेंसरों की जांच फीस 5,000 रुपये प्रति नोजल, जबकि सीएनजी-एलपीजी-एलएनजी-हाइड्रोजन डिस्पेंसरों की जांच फीस 10,000 रुपये प्रति नोजल निर्धारित।
- •राज्यों को दी गई अतिरिक्त शक्तियां; वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार जीएटीसी जांच के लिए नई श्रेणियां अधिसूचित कर सकेंगे।
नई दिल्ली, [तारीख]: देश में स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा संक्रमण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब हाइड्रोजन, सीएनजी, एलपीजी और एलएनजी जैसे वैकल्पिक ईंधनों के फ्यूल डिस्पेंसरों की भी सरकारी जांच संभव हो सकेगी। उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम के अंतर्गत नियमों में संशोधन किया है, जिसके तहत सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (जीएटीसी) को इन फ्यूल पंपों की जांच करने की अनुमति प्रदान की गई है। इस बदलाव से ईंधन की माप-तोल व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और उपभोक्ताओं को सही मात्रा में ईंधन मिलने में मदद मिलेगी।






