विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए सोना बेचने की अपील: क्या है पूरा मामला और इससे जुड़े बड़े फैक्ट्स?

मुख्य बातें
- •सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए सोने के आयात शुल्क में वृद्धि की और लोगों से सोना खरीदना कम करने की अपील की।
- •भारत के पास करीब 25 हजार टन सोना है, जिसका अधिकांश हिस्सा घरों और लॉकरों में पड़ा है और उत्पादक उपयोग में नहीं आ रहा।
- •विशेषज्ञों के अनुसार, अगर लोग अपने सोने का 2-4% हिस्सा बेच दें, तो देश के सोने के आयात बिल में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहेगा।
- •सोने के अलावा इक्विटी, गोल्ड ईटीएफ, म्यूचुअल फंड और सरकारी योजनाओं जैसे विकल्प भी बेहतर रिटर्न प्रदान कर सकते हैं।
दुनिया में बढ़ते भू-राजनैतिक तनाव के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सोना खरीदना बंद करने और मौजूदा सोने का बेहतर उपयोग करने की अपील की है। इसी क्रम में सरकार ने सोने के आयात शुल्क को भी 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। इस फैसले के बाद सोना खरीदने और निवेश करने को लेकर लोगों के बीच नए सिरे से चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारतीय परिवार अपने पास रखे सोने का सिर्फ 2-3 प्रतिशत हिस्सा बेच दें, तो इससे देश के आयात बिल में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी।
भारतीय समाज में सोने का विशेष महत्व रहा है। सदियों से लोग सोने के गहनों को न केवल आभूषण के रूप में बल्कि धन संचय के तरीके के रूप में भी देखते आए हैं। इसी कारणवश देश में करीब 25 हजार टन सोना घरों, लॉकरों और अन्य जगहों पर संचित है। सोने की इस विशाल मात्रा का अधिकांश हिस्सा लोगों द्वारा भावनात्मक लगाव और सुरक्षा की दृष्टि से रखा गया है, जिससे इसका उत्पादक उपयोग नहीं हो पाता। विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोगों को अपने इस सोने को बेहतर तरीके से उपयोग में लाना चाहिए, जैसे कि उसे बेचकर अन्य निवेश विकल्पों में लगाना। इससे न केवल उनकी संपत्ति बढ़ेगी बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी सहायता मिलेगी।






