राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम बापू की उम्रकैद बरकरार रखी, तुरंत सरेंडर का आदेश दिया
मुख्य बातें
- •राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम बापू की नाबालिग से बलात्कार मामले में दी गई उम्रकैद की सजा बरकरार रखी
- •न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने 27 मई 2026 को फैसला सुनाया
- •आसाराम को तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया गया, उनकी अंतरिम जमानत रद्द
- •शिल्पी और शरतचंद को बरी किया गया, जबकि आसाराम की सजा बरकरार
- •मामला 2013 का है, जब नाबालिग पीड़िता ने आश्रम में यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी
राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार, 27 मई 2026 को आसाराम बापू को नाबालिग से यौन उत्पीड़न एवं बलात्कार मामले में बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ की डिवीजन बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे, ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है। कोर्ट ने आसाराम को तुरंत जमानत रद्द कर सरेंडर करने का आदेश दिया है। फिलहाल वे पैरोल पर बाहर थे और उनकी जमानत की अवधि 7 जुलाई 2026 तक बढ़ाई गई थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिग पीड़िता के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसी मामले में आरोपी रहे शिल्पी और शरतचंद को उच्च न्यायालय ने बरी कर दिया है। दोनों आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। इस फैसले से सिर्फ आसाराम की सजा बरकरार रहने से पीड़िता पक्ष को बड़ी राहत मिली है।




