जयपुर में मिलेगा असम-बंगाल की ज्वेलरी को नया बाज़ार, ज्वेलर्स बोले- पुराने गोल्ड से मिलेगा फायदा
मुख्य बातें
- •असम और पश्चिम बंगाल की पारंपरिक ज्वेलरी अब जयपुर में उपलब्ध होगी।
- •ज्वेलर्स का कहना है कि पुराने सोने को रीसाइक्लिंग कर नई ज्वेलरी बनाई जाएगी।
- •इससे पारंपरिक कला को संरक्षण मिलेगा और पर्यावरण को फायदा होगा।
- •जयपुर के ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने इस पहल की जानकारी दी।
- •इस पहल से स्थानीय कारीगरों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
जयपुर, 12 अप्रैल 2024: राजस्थान के जयपुर में पारंपरिक ज्वेलरी के लिए एक नया बाज़ार तैयार हो रहा है। असम और पश्चिम बंगाल की खास शैली की ज्वेलरी अब यहां के ग्राहकों को आकर्षित करेगी। स्थानीय ज्वेलर्स का कहना है कि इस पहल से न केवल पारंपरिक डिज़ाइन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पुराने सोने को रीसाइक्लिंग कर नई ज्वेलरी बनाने का भी रास्ता साफ होगा।
जयपुर के प्रतिष्ठित ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि असम और बंगाल की ज्वेलरी अपने अनूठे डिज़ाइन और शिल्पकारी के लिए जानी जाती है। "हमारी कोशिश है कि इन राज्यों की पारंपरिक ज्वेलरी को जयपुर में एक नया बाज़ार मिले। इससे न केवल स्थानीय कारीगरों को रोजगार मिलेगा, बल्कि ग्राहकों को भी नए डिज़ाइन मिल सकेंगे," उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि पुराने सोने को खरीदने के बजाय ग्राहक अब पुरानी ज्वेलरी को बेचकर नई डिज़ाइन वाली ज्वेलरी खरीद सकेंगे।
इस पहल के तहत, जयपुर के ज्वेलर्स असम और बंगाल के कारीगरों के साथ मिलकर काम करेंगे। इससे न केवल पारंपरिक कला को संरक्षण मिलेगा, बल्कि सोने के रीसाइक्लिंग से पर्यावरण को भी फायदा होगा। शर्मा ने बताया कि इस प्रक्रिया से सोने की खपत भी कम होगी, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव कम होगा।
