भारत में दहेज प्रथा: हर दिन 16 महिलाओं की मौत, NCRB के आँकड़े चौंकाने वाले

मुख्य बातें
- •राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार वर्ष 2024 में दहेज हत्याओं के 5,737 मामले दर्ज किए गए, जो प्रतिदिन औसतन 16 महिलाओं की जान ले रहा है।
- •उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में दहेज हत्याओं की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है।
- •ट्विशा शर्मा, निक्की भाटी और दीपिका नागर जैसे मामलों ने समाज का ध्यान दहेज प्रथा की भयावहता की ओर खींचा है।
- •समाज में व्याप्त चुप्पी और समझौतावादी मानसिकता दहेज प्रथा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के नवीनतम आँकड़ों ने एक बार फिर से देश का ध्यान दहेज प्रथा की भयावहता की ओर खींचा है। वर्ष 2024 के आँकड़ों के अनुसार, भारत में दहेज से संबंधित हिंसा और हत्याओं का आँकड़ा चौंकाने वाला है। औसतन हर दिन 16 महिलाएँ इस कुप्रथा का शिकार होकर अपनी जान गँवा रही हैं। कुल मिलाकर, वर्ष 2024 में दहेज हत्याओं के 5,737 मामले दर्ज किए गए, जो कि प्रतिदिन 15 से 16 महिलाओं के जीवन पर पड़ रहे भयावह प्रभाव को दर्शाता है।
इस सामाजिक बुराई के कारण देश भर में कई दुखद मामले सामने आए हैं, जिनमें ट्विशा शर्मा, निक्की भाटी और दीपिका नागर जैसे नाम प्रमुख हैं। ये मामले न केवल समाज के भीतर आक्रोश पैदा करते हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि दहेज प्रथा आज भी भारतीय समाज में गहराई से जड़ जमाए हुए है। समाज की चुप्पी और परिवारों की समझौतावादी मानसिकता इस कुप्रथा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कई बार पीड़ित परिवार कानूनी लड़ाई लड़ने से बचते हैं, जिससे अपराधी बेखौफ होकर अपने कृत्यों को अंजाम देते रहते हैं।






