शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर सख्त कार्रवाई की है, टेंडर विवाद और छात्रों की शिकायतों का उठा सवाल

मुख्य बातें
- •शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पर उठे विवाद के बाद सख्त रुख अपनाया है और मामले की आंतरिक जांच शुरू की है। - टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बाद हैदराबाद की कंपनी कोएम्प्ट एडु टेक को दिए गए कॉन्ट्रैक्ट पर सवाल उठाए गए हैं। - सीबीएसई ने पहली बार वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में OSM प्रणाली लागू की थी, लेकिन तकनीकी खराबियों और छात्रों की शिकायतों के कारण विवाद बढ़ा है। - शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह मामला तकनीकी गड़बड़ी से आगे बढ़कर पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा शुरू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पर उठे विवाद के बाद अब शिक्षा मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है। छात्रों की तकनीकी समस्याओं और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लिया है। शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई से इस पूरी प्रक्रिया की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और मामले की आंतरिक जांच भी शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, बोर्ड की ओर से अब तक दिए गए जवाब मंत्रालय को संतोषजनक नहीं लगे हैं, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। इस विवाद का केंद्र हैदराबाद स्थित कंपनी कोएम्प्ट एडु टेक को दिया गया टेंडर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोप लगाए गए हैं कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान कंपनी की योग्यता और तकनीकी शर्तों में कई बार बदलाव किए गए, ताकि वह पात्र बन सके। इस मामले में शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई से पूरी जानकारी मांगी है और टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। सीबीएसई ने वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की थी। इस प्रणाली के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल माध्यम से जांचा गया था। बोर्ड का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना था, लेकिन इसके लागू होने के बाद कई तकनीकी समस्याओं की शिकायतें सामने आईं। छात्रों ने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान कई गड़बड़ियों की शिकायत की। कुछ छात्रों ने बताया कि उन्हें उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी धुंधली दिखाई दी, जबकि कई मामलों में पन्ने गायब होने या दूसरी कॉपी दिखाई देने जैसी समस्याएं भी सामने आईं। इसके अलावा, पोर्टल पर बार-बार तकनीकी खराबी आने से भी छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह मामला केवल तकनीकी गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाता है। इसलिए, अब जांच के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है और आवश्यक कार्रवाई भी की जा सकती है। मंत्रालय ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जांच शुरू की है, जिससे भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोका जा सके। वहीं, सीबीएसई के अधिकारियों ने अब तक किसी भी प्रकार की जवाबदेही से इनकार किया है, लेकिन शिक्षा मंत्रालय के सख्त रुख के बाद बोर्ड को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि यदि दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने न केवल सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की भी मांग उठाई है।
