भारत-नेपाल संबंध: राजनीतिक मतभेद के बीच भी मजबूत हैं 'रोटी-बेटी' के रिश्ते

मुख्य बातें
- •भारत और नेपाल के बीच 'रोटी-बेटी' का संबंध सदियों पुराना और गहरा है, जिसे राजनीतिक मतभेदों से तोड़ा नहीं जा सकता।
- •लिपुलेख दर्रे को लेकर दोनों देशों के बीच राजनीतिक स्तर पर विवाद चल रहा है, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों में कोई कमी नहीं आई है।
- •नेपाल की जनता और व्यवसायी वर्ग मानसरोवर यात्रा के दौरान भारतीय तीर्थयात्रियों का स्वागत करने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं।
- •दोनों देशों के बीच खुली सीमाएं लोगों को एक-दूसरे के देश में स्वतंत्र रूप से आवागमन की सुविधा प्रदान करती हैं।
- •दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां काफी सक्रिय हैं, जिससे दोनों देशों के लोगों को आर्थिक लाभ मिलता है।
भारत और नेपाल के बीच के संबंध इतने गहरे और व्यापक हैं कि इन्हें राजनीतिक तनावों से भी तोड़ा नहीं जा सकता। दोनों देशों के बीच न केवल भूगोलिक सीमाएं जुड़ी हुई हैं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक संबंध भी इतने प्रगाढ़ हैं कि इन्हें अलग-अलग करके देखा ही नहीं जा सकता। चाहे राजनीतिक स्तर पर कितने भी मतभेद क्यों न हों, दोनों देशों के बीच का 'रोटी-बेटी' का रिश्ता सदियों पुराना और गहरा है। यही कारण है कि लिपुलेख दर्रे को लेकर नेपाल सरकार द्वारा विरोध जताए जाने के बावजूद, नेपाल की जनता और व्यापारी वर्ग भारतीयों का विशेष रूप से मानसरोवर यात्रा के दौरान स्वागत करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।






