सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों की हत्या के खिलाफ याचिका, एनजीओ ने किया आरोप

मुख्य बातें
- •‘एनिमल्स आर पीपल टू’ नामक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों की हत्या के खिलाफ याचिका दायर की है।
- •याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य और स्थानीय अधिकारी कोर्ट के निर्देशों की गलत व्याख्या कर रहे हैं।
- •एनजीओ का कहना है कि इच्छामृत्यु केवल सीमित परिस्थितियों में ही दी जा सकती है और इसके लिए ‘एबीसी नियम, 2023’ का पालन जरूरी है।
- •सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में आवारा कुत्तों की नसबंदी और शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया था, जिसे कई एनजीओ ने चुनौती दी थी।
नई दिल्ली: पूरे देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके काटने की घटनाओं के बीच एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ने सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की है। ‘एनिमल्स आर पीपल टू’ नामक इस एनजीओ का आरोप है कि कई राज्य और स्थानीय अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों की गलत व्याख्या कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि कोर्ट के किसी भी आदेश में आवारा कुत्तों की अंधाधुंध हत्या की अनुमति नहीं दी गई है। याचिका में कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि क्या उसके किसी निर्देश में कुत्तों को मारने की इजाजत दी गई है।
एनजीओ ने अपनी याचिका में बताया है कि इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया) केवल बेहद सीमित परिस्थितियों में ही दी जा सकती है। इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा जांच और पुष्टि जरूरी है। साथ ही, इस प्रक्रिया को ‘एबीसी नियम, 2023’ के प्रावधानों का सख्ती से पालन करना होगा। संगठन का आरोप है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक बयान और खालसा कॉलेज परिसर से कुत्तों को हटाने की घटनाओं के बाद अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ‘कुत्तों को खत्म करने’ के लाइसेंस के तौर पर व्याख्या करना शुरू कर दिया है।
