दिल्ली की पानी की ज़रूरत पूरी करने में कैसे गंगा का पानी साफ होता है? जानिए 6 कड़े चरणों की पूरी कहानी

मुख्य बातें
- •दिल्ली जल बोर्ड द्वारा भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में गंगा जल को 6 चरणों में शोधित किया जाता है।
- •यह प्रक्रिया रेत फिल्टरेशन, रासायनिक उपचार, फ्लोक्यूलेशन, अवसादन, फिल्टरेशन और विसंक्रमण से होकर गुजरती है।
- •अधिकारियों का दावा है कि इस प्रक्रिया से पानी की गुणवत्ता सभी मानकों पर खरी उतरती है।
- •गंगा जल को दिल्ली लाने से शहर की पानी की कमी को कम करने में मदद मिल रही है।
- •इस प्रक्रिया की लागत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी विशेषज्ञों में बहस जारी है।
देश की राजधानी दिल्ली को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने गंगा नदी से पानी लाकर उसकी ज़रूरत पूरी करने की कोशिश की है। हाल ही में दिल्ली जल बोर्ड ने भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दिखाया गया है कि गंगा के पानी को किस तरह से छह लंबे और कठोर चरणों से गुजारकर पीने योग्य बनाया जाता है। यह प्रक्रिया न केवल तकनीकी दृष्टि से उन्नत है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिहाज़ से भी बेहद महत्वपूर्ण है।
इस प्रक्रिया का पहला चरण है जल का प्रवाह। गंगा नदी से पानी को पाइपलाइनों के माध्यम से भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक लाया जाता है, जो हरिद्वार के पास स्थित है। यहां पानी को रेत और अन्य अशुद्धियों से छानने के लिए बड़े-बड़े फिल्टरों का इस्तेमाल किया जाता है। दूसरा चरण है रासायनिक उपचार। इसमें पानी में क्लोरीन और अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि बैक्टीरिया और वायरस खत्म हो सकें। तीसरा चरण है फ्लोक्यूलेशन, जिसमें पानी में मिलाए गए रसायनों की मदद से छोटे-छोटे कण आपस में मिलकर बड़े होते हैं और आसानी से छन जाते हैं।






