भारतीय ड्रोन उद्योग 2026: युद्ध से लेकर आपूर्ति शृंखला तक, तेजी से बढ़ता एक उभरता हुआ क्षेत्र

मुख्य बातें
- •भारतीय ड्रोन उद्योग 2026 तक पूर्वानुमान से भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें 600 से अधिक निर्माता और 200 से अधिक आपूर्तिकर्ता शामिल हैं।
- •पश्चिम एशिया युद्ध के कारण ड्रोन बाजार का आकार और भी बड़ा हो गया है, जिससे 2030 तक 11 अरब डॉलर के अनुमान को पीछे छोड़ दिया गया है।
- •उद्योग में आत्मनिर्भरता बढ़ रही है, शीर्ष कंपनियां 70-75% स्वदेशी घटकों का उपयोग कर रही हैं और चीन पर निर्भरता कम हो रही है।
- •स्वायत्त डिलिवरी प्रणाली में हवाई ड्रोन और जमीन रोबोट मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं रह गई है।
- •नियामक ढांचे में सुधार हुआ है, नियमों को सरल बनाया गया है, जिससे उद्योग के विकास को गति मिली है।
मुंबई का मई का मौसम अपने आप में कई मायनों में चुनौतीपूर्ण होता है — भीषण गर्मी, उमस और हर कोने पर लोगों की राय। लेकिन इस साल इस माहौल में एक नया आयाम जुड़ गया: इमेजिनेक्स्ट 2026, जिसने हजारों लोगों को एक साथ लाकर भविष्य निर्माण का संकल्प दिलाया। इसी माहौल में, भारतीय ड्रोन महासंघ (डीएफआई) के अध्यक्ष स्मित शाह से हुई बातचीत में ड्रोन उद्योग की वर्तमान स्थिति, इसकी संभावनाएं, चुनौतियां और भविष्य की दिशा पर गहन चर्चा हुई।
शाह के अनुसार, भारतीय ड्रोन उद्योग 2026 तक किसी भी पूर्वानुमान से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में उद्योग में 600 से अधिक ड्रोन निर्माता और 200 से अधिक घटक आपूर्तिकर्ता सक्रिय हैं। रक्षा क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिसे शाह ने "बूमिंग" बताया। इतना ही नहीं, counter-drone बाजार भी उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है, जिसमें गलत ड्रोनों को रोकने के लिए तकनीक विकसित की जा रही है।



