पांच वर्ष तक तबाही मचाएगा ‘सुपर अल नीनो’: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट, विश्व में चिंता बढ़ी
मुख्य बातें
- •संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार ‘सुपर अल नीनो’ आगामी पांच वर्ष तक विश्वभर में तबाही मचाएगा। - ‘सुपर अल नीनो’ सामान्य ‘अल नीनो’ की तुलना में अधिक शक्तिशाली है और इसके कारण विश्वभर में मौसम में असाधारण परिवर्तन होंगे। - भारत सहित एशिया के कई देशों में गर्मियां अधिक तीव्र होंगी और अनियमित वर्षा की संभावना है। - यूएन के अधिकारियों ने कहा है कि यह घटना मानवता के लिए एक बड़ा चुनौती है और इसके लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक ताज़ा रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार ‘सुपर अल नीनो’ नामक मौसम का प्रचंड प्रकार आगामी पांच वर्ष तक विश्वभर में तबाही मचा सकता है। इस संबंध में चिंता विश्वभर के देशों में फैल रही है, क्योंकि इसके कारण तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा और अन्य मौसम संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यूएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘सुपर अल नीनो’ के कारण ग्लोबल वार्मिंग में भी वृद्धि होगी, जिसका लंबे समय तक पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ‘अल नीनो’ एक मौसम की घटना है, जो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण उत्पन्न होती है। सामान्य ‘अल नीनो’ की तुलना में ‘सुपर अल नीनो’ अधिक शक्तिशाली होता है और इसके कारण विश्वभर में मौसम में असाधारण परिवर्तन होते हैं। यूएन के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह घटना आगामी पांच वर्ष तक जारी रहेगी और इसके कारण विश्व के कई हिस्सों में गर्मी, सूखा और बाढ़ जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ‘सुपर अल नीनो’ के कारण भारत सहित एशिया के कई देशों में गर्मियां अधिक तीव्र होंगी। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी अनियमित वर्षा और सूखे की संभावना है। यूएन के अधिकारियों ने कहा है कि यह घटना मानवता के लिए एक बड़ा चुनौती है और इसके लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ‘सुपर अल नीनो’ के कारण समुद्र की सतह के तापमान में होने वाले परिवर्तनों के कारण मौसम में असाधारण परिवर्तन हो रहे हैं। यह घटना केवल पांच वर्ष के लिए नहीं, बल्कि इसके कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं का प्रभाव दशकों तक रह सकता है। यूएन की रिपोर्ट में देशों को इस घटना का सामना करने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
