होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का भारत के कच्चे तेल बजट पर असर, जानिए कितना हुआ नुकसान

मुख्य बातें
- •होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।
- •होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने पर भारतीय तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
- •पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के बाद यह नुकसान घटकर लगभग 600 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है।
- •भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट से काफी प्रभावित होता है।
तेहरान/नई दिल्ली – वैश्विक तेल बाजार में हाल ही में उत्पन्न हुई अशांति के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की स्थिति से भारत के कच्चे तेल आयात बजट पर व्यापक असर पड़ा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा था, तब भारतीय तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था। हालांकि, हाल ही में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में हुई वृद्धि के बाद यह नुकसान घटकर लगभग 600 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार की रुकावट से भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है। पिछले कुछ हफ्तों में इस मार्ग में राजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण कई देशों ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की थी। भारत भी इनमें से एक है, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है।






