इबोला वायरस का नाम कैसे पड़ा? जानिए इतिहास और रहस्य

मुख्य बातें
- •वर्ष 1976 में कांगो के यम्बुकू गांव में इबोला वायरस का पहला प्रकोप सामने आया था।
- •इस वायरस का नाम यम्बुकू गांव के पास बहने वाली नदी 'इबोला' के नाम पर रखा गया था।
- •वैज्ञानिकों ने शुरू में गांव का नाम सार्वजनिक नहीं किया था, ताकि वहां के लोगों पर प्रभाव न पड़े।
- •इबोला वायरस के ज़ायर प्रकार की मृत्यु दर 90% तक हो सकती है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा चिह्नित सबसे खतरनाक वायरसों में से एक इबोला का नाम सुनते ही लोगों में दहशत पैदा हो जाती है। मगर क्या आप जानते हैं कि इस वायरस का नाम आखिर पड़ा कहां से? इसकी कहानी बेहद रोचक और रहस्यमयी है। दरअसल, इबोला वायरस का नाम कांगो के एक छोटे से गांव से लिया गया है, जहां सबसे पहले इसका प्रकोप सामने आया था। 1976 में जब इस घातक वायरस का पहला मामला सामने आया, तब वैज्ञानिकों ने इसे यम्बुकू गांव के नाम पर इबोला कहा था।
पहला प्रकोप और नामकरण सितंबर 1976 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (तत्कालीन ज़ायरे) के यम्बुकू गांव में एक अज्ञात बीमारी फैल गई। अस्पताल में काम कर रहे लोगों में से कई बीमार पड़ने लगे और उनकी मौत हो गई। इसी दौरान, के नज़ारा गांव में भी इसी तरह के मामले सामने आए। वैज्ञानिकों ने इस बीमारी का कारण एक नए प्रकार के वायरस को बताया, जिसे बाद में नाम दिया गया। "इबोला" शब्द पर आधारित है, जो यम्बुकू गांव के पास बहती थी। हालांकि, शुरू में वैज्ञानिकों ने इस गांव का नाम सार्वजनिक नहीं किया था, ताकि वहां के लोगों पर किसी तरह का सामाजिक या आर्थिक प्रभाव न पड़े।






