विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया, जानिए भारत की तैयारी और चुनौतियां

मुख्य बातें
- •विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अफ्रीका में फैले इबोला वायरस को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।
- •भारत सरकार ने हवाई अड्डों और सीमा चौकियों पर सख्त निगरानी बढ़ाई है और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
- •इबोला के लक्षणों में तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त और आंतरिक रक्तस्राव शामिल हैं।
- •विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को पिछले अनुभवों से सीख लेनी चाहिए और स्वास्थ्य ढांचे में सुधार करना चाहिए।
पूरी दुनिया में एक बार फिर से इबोला वायरस का खतरा बढ़ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अफ्रीका के युगांडा और दक्षिण सूडान में बढ़ते इबोला के प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। इबोला एक जानलेवा वायरस है, जिसका अब तक कोई प्रभावी इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। इसकी मृत्यु दर 50 से 90 प्रतिशत तक हो सकती है, जो इसे दुनिया के सबसे खतरनाक वायरसों में से एक बनाती है।
भारत सरकार ने भी इस खतरे को गंभीरता से लिया है और तत्परता के साथ तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अलर्ट जारी किया है। हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सीमा चौकियों पर सख्त निगरानी बढ़ा दी गई है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे किसी भी संदिग्ध मामले की तुरंत पहचान कर सकें और उसे नियंत्रित कर सकें।






