काशी : भगवान शिव की नगरी जहां मृत्यु भी हार जाती है, जानिए क्या है इसका रहस्य

मुख्य बातें
- •काशी को भगवान शिव की नगरी माना जाता है और इसे वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है।
- •पुराणों के अनुसार, काशी में मृत्यु को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को यमराज के अधिकार से मुक्ति मिल जाती है।
- •भगवान शिव काशी में कभी भी विश्राम नहीं करते और हमेशा जागृत रहते हैं।
- •काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहां भगवान शिव स्वयं मोक्ष प्रदान करते हैं।
- •काशी में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान होने की मान्यता है।
हिंदू धर्म में काशी अथवा वाराणसी को सबसे प्राचीन और पवित्र नगर माना जाता है। इसे भगवान शिव की नगरी के रूप में भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी हुई है और प्रलय के समय भी यह नगरी डूबेगी नहीं। यहां भगवान शिव स्वयं ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं और रोजाना लाखों भक्त उनके दर्शन और पूजन करते हैं।
काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है। पुराणों में वर्णित है कि काशी में मृत्यु को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को स्वयं भगवान शिव मोक्ष प्रदान करते हैं। यही कारण है कि यहां मृत्यु को जीवन के अंतिम सोपान के बजाय मुक्ति का मार्ग माना जाता है। गरुड़ पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, काशी में मृत्यु को प्राप्त करने वाला व्यक्ति मृत्यु के देवता यमराज के अधिकार से मुक्त हो जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं मृतक के कान में तारक मंत्र फूंकते हैं, जिससे मृत्यु के देवता यमराज भी वहां प्रवेश नहीं कर पाते।
