साकेत में मेट्रो स्टेशन के पास 5 मंजिला इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत, दो घायल; ‘मेस आंटी’ सहित कई छात्रों के प्रिय चेहरे थे शिकार

मुख्य बातें
- •दक्षिण दिल्ली के साकेत में शनिवार शाम एक 5 मंजिला इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत हुई तथा 2 व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए।
- •मृतकों में ‘मेस आंटी’ के नाम से मशहूर 50 वर्षीय पार्वती भी शामिल हैं, जो नेपाल की रहने वाली थीं तथा साकेत में मेस चलाती थीं।
- •दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा लापरवाही बरतने वाले दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया।
- •सीएम ने शहर में जर्जर इमारतों की व्यापक जांच तथा उचित कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
दक्षिण दिल्ली के साकेत स्थित मेट्रो स्टेशन के निकट शनिवार की शाम एक भीषण दुर्घटना हुई। पांच मंजिला एक आवासीय इमारत突然间 भरभराकर गिर गई, जिसमें अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अतिरिक्त, दो व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। इस घटना में मलबे के नीचे दबने से एक महिला सहित कुल छह लोगों की जान चली गई। घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों ने बताया कि मलबे से शवों को निकालने का कार्य जारी है।
मृतकों में 50 वर्षीय पार्वती नाम की महिला भी शामिल हैं, जिन्हें आस-पास के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र प्यार से ‘मेस आंटी’ कहकर पुकारते थे। पार्वती मूल रूप से नेपाल की रहने वाली थीं और पिछले कई वर्षों से दक्षिण दिल्ली के साकेत क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रह रही थीं। उन्होंने डेढ़ साल पहले साकेत में एक नई मेस खोली थी, जिसमें मुख्य रूप से मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे सैकड़ों छात्र नियमित रूप से भोजन करने आते थे। उनके द्वारा तैयार किया जाने वाला खाना न केवल सस्ता था, बल्कि घर के स्वाद जैसा होने के कारण छात्रों में काफी लोकप्रिय था। पार्वती अपने जन्मदिन पर भी मेस के कर्मचारियों और छात्रों के साथ खुशियां मनाती थीं तथा किसी भी छात्र को भूखा नहीं लौटने देती थीं। यहां तक कि देर रात तक भी वे छात्रों के लिए भोजन उपलब्ध कराती थीं। मेडिकल के छात्र कपिल ने बताया कि हर दिन लगभग सौ छात्र उनकी मेस में आते थे और उन्हें घर जैसा माहौल मिलता था। मोहम्मद इमाम नामक एक अन्य छात्र ने बताया कि मेस में दाल, चावल, सब्जी, सलाद, पराठा और ऑमलेट बेहद किफायती दरों पर मिलता था और अगर कोई देर से भी पहुंचता, तो पार्वती कभी मना नहीं करती थीं।



