लद्दाख में निर्वाचित निकाय को केंद्र सरकार की सहमति, राज्य का दर्जा अभी दूर

मुख्य बातें
- •केंद्र सरकार ने लद्दाख में निर्वाचित संघ शासित प्रदेश निकाय को स्वीकार करने की सहमति व्यक्त की है।
- •गृह मंत्रालय ने लद्दाख को तुरंत राज्य का दर्जा देने से इनकार किया, लेकिन भविष्य में इस पर विचार खुला रखा है।
- •कुनवांग पाल्जोर वांगचुक ने इसे सकारात्मक बदलाव बताया और केंद्र सरकार से लद्दाख की मांगों पर ध्यान देने की अपील की।
- •लद्दाख को 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था।
केंद्र सरकार ने लद्दाख में निर्वाचित संघ शासित प्रदेश (UT) निकाय को स्वीकार करने की सहमति व्यक्त की है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि लद्दाख की सीमित राजस्व सृजन क्षमता के कारण तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता। हालांकि, सरकार ने इस संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है और भविष्य में इस पर विचार किया जा सकता है। लद्दाख के पूर्व सांसद और सामाजिक कार्यकर्ता कुनवांग पाल्जोर वांगचुक ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह एक सकारात्मक बदलाव है। उन्होंने कहा, "यह पहला कदम है जो लद्दाखियों की मांगों को समझने की दिशा में उठाया गया है।" वांगचुक ने जोर दिया कि केंद्र सरकार को लद्दाख की विशिष्ट पहचान और जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने से पहले इसके आर्थिक और प्रशासनिक पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया जाना आवश्यक है। फिलहाल, लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में प्रशासित किया जा रहा है, जिसे 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग कर बनाया गया था। इस फैसले के बाद लद्दाख की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति पर एक नया दृष्टिकोण उभरने की उम्मीद है। हालांकि, राज्य का दर्जा अभी दूर की कौड़ी लगता है, लेकिन केंद्र सरकार की यह पहल स्थानीय नेताओं और निवासियों के लिए एक राहत के रूप में देखी जा रही है।
