मुजफ्फरपुर के लीची किसानों की मुश्किल: मौसम की मार से उत्पादन में 70 फीसदी तक गिरावट, दोगुनी हुई कीमतें

मुख्य बातें
- •मुजफ्फरपुर में लीची उत्पादन में 70% गिरावट, पिछले वर्ष 1.25 लाख टन के मुकाबले इस बार केवल 30 हजार टन उत्पादन हुआ।
- •मौसम की मार जैसे तूफान, ओलावृष्टि और असामान्य बारिश के कारण फसल को नुकसान पहुंचा, जिससे फल समय से पहले गिर गए।
- •लीची की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, सामान्यतः 100 रुपये प्रति किलो के स्थान पर अब 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं।
- •निर्यातकों और उपभोक्ताओं को भी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बाजार में लीची की उपलब्धता काफी कम हो गई है।
बिहार के मुजफ्फरपुर में लीची की खेती कर रहे किसानों के लिए इस बार का मौसम किसी चुनौती से कम नहीं रहा है। पिछले वर्षों में जहां लीची का उत्पादन प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 25 हजार टन तक होता था, वहीं इस बार यह घटकर मात्र 30 हजार टन रह गया है। मौसम की मार ने न केवल उत्पादन को प्रभावित किया है, बल्कि बाजार में लीची की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है। सामान्यतः जहां लीची 100 रुपये प्रति किलो तक बिकती थी, वहीं अब इसकी कीमत 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इस असामान्य वृद्धि के कारण आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ निर्यातकों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
मुजफ्फरपुर की लीची को पूरे देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद किया जाता है। लेकिन इस बार की कमी के कारण निर्यातकों को भी अपने ऑर्डरों को पूरा करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि बार-बार आने वाले तूफानों, ओलावृष्टि और असामान्य बारिश के कारण फसल को काफी नुकसान हुआ है। कई किसानों ने बताया कि उनकी लीची के पेड़ों में फल तो लगे थे, लेकिन मौसम की प्रतिकूलता के कारण वे समय से पहले ही गिर गए। इससे न केवल उत्पादन में कमी आई है, बल्कि फल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है।






