चंद्र देव और भगवान शिव: क्या है 16 कलाओं से परिपूर्ण चंद्र का संबंध, जानिए शिव पूजा से चंद्र दोष का निवारण

मुख्य बातें
- •चंद्र देव 16 कलाओं से परिपूर्ण माने जाते हैं, जो पूर्णिमा से अमावस्या तक के चरणों को दर्शाती हैं।
- •भगवान शिव ने चंद्र देव को अपने मस्तक पर धारण किया है, जिसे 'चंद्रशेखर' स्वरूप के नाम से जाना जाता है।
- •शिवपुराण के अनुसार, चंद्र देव को ब्रह्मा जी के श्राप से मुक्ति दिलाने के बाद शिव ने उन्हें सिर पर स्थान दिया।
- •चंद्र दोष दूर करने के लिए शिव पूजा, विशेषकर सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाने से लाभ होता है।
- •ज्योतिष शास्त्र में चंद्र दोष के कारण मानसिक अशांति और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- •शिव की आराधना से मनुष्य अपने मन को शांत कर सकता है और जीवन में स्थिरता प्राप्त कर सकता है।
सनातन धर्म की समृद्ध परंपरा में कई तीज-त्योहार चंद्र देवता से गहराई से जुड़े हुए हैं। इनमें से एक प्रमुख प्रश्न जो सदियों से श्रद्धालुओं के मन में रहा है, वह यह है कि चंद्र देव 16 कलाओं से परिपूर्ण हैं, फिर भगवान शिव ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण क्यों किया? इसके पीछे पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं की गहरी परतें हैं, जिन्हें समझना अत्यंत रोचक है।





