नाशिक धर्मांतरण मामला: एक शिकायत से कैसे उजागर हुआ ‘प्रलोभन-धर्मांतरण’ का कथित रैकेट, जानिए पूरा मामला
मुख्य बातें
- •नाशिक में एक शिकायत के आधार पर कथित जबरन धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश हुआ।
- •पुलिस ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें मुख्य आरोपी मोहम्मद रफीक शामिल हैं।
- •आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं और महाराष्ट्र धर्मांतरण प्रतिबंध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
- •आरोपियों का एक बड़ा नेटवर्क महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में सक्रिय था।
महाराष्ट्र के नाशिक में कथित जबरन धर्मांतरण के एक मामले ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय निवासी द्वारा दर्ज एक शिकायत के आधार पर पुलिस ने एक बड़े ‘प्रलोभन-धर्मांतरण रैकेट’ का पर्दाफाश किया। पुलिस के अनुसार, इस रैकेट में शामिल लोगों पर आरोप है कि वे लोगों को धन, नौकरी या अन्य सुविधाओं के लालच में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन करा रहे थे।
मामले की शुरुआत 15 अगस्त 2024 को हुई जब एक स्थानीय निवासी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके परिवार को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए गए, जिसके बाद उनके धर्मांतरण के लिए दबाव डाला गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले की जांच शुरू की और जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सबूतों के साथ-साथ आरोपियों के नाम भी उजागर किए।
पुलिस ने अब तक इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी के रूप में 45 वर्षीय मोहम्मद रफीक शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में उनके परिवार के सदस्य और कुछ स्थानीय लोग शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने), 34 (सामान्य उद्देश्य के लिए अपराध करने) और धर्मांतरण विरोधी कानून (महाराष्ट्र धर्मांतरण प्रतिबंध अधिनियम, 2021) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
