एसएससी जीडी परीक्षा में भारी अव्यवस्था: केंद्रों पर कंप्यूटर खाली, दोगुने अभ्यर्थी पहुंचे, कई जगहों पर हुई तोड़फोड़

मुख्य बातें
- •मई को उत्तर प्रदेश और बिहार के कई केंद्रों पर एसएससी जीडी परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों ने जमकर विरोध किया और कई केंद्रों पर परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
- •मुजफ्फरपुर, कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में केंद्रों पर अभ्यर्थियों की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक थी, जिससे भीड़ और आक्रोश बढ़ा।
- •कई केंद्रों पर कंप्यूटर स्क्रीन खाली रह गईं और अभ्यर्थियों को परीक्षा रद्द होने की सूचना देर से मिली, जिससे उन्होंने तोड़फोड़ की।
- •एसएससी ने नोटिस जारी कर बताया कि परीक्षा 27 मई के बाद की किसी तिथि पर पुनर्निर्धारित की जाएगी, लेकिन नई तिथि की घोषणा अभी बाकी है।
कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) द्वारा आयोजित की जा रही जीडी कांस्टेबल परीक्षा में इस महीने बड़े पैमाने पर अव्यवस्था देखने को मिल रही है। 25 मई को उत्तर प्रदेश और बिहार के कई केंद्रों पर परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया, तोड़फोड़ की और कई केंद्रों पर परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इस पूरे मामले ने तेजी पकड़ ली है क्योंकि अभ्यर्थियों को समय पर प्रवेश नहीं मिला, कंप्यूटर स्क्रीन खाली रह गए और कुछ केंद्रों पर तो निर्धारित सीटों से दोगुने अभ्यर्थी पहुंच गए। इससे उत्पन्न आक्रोश के कारण कई केंद्रों पर पुलिस-प्रशासन को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।
25 मई को कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मुजफ्फरपुर समेत कई शहरों में परीक्षा केंद्रों पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। मुजफ्फरपुर के बीबी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर दूसरी और तीसरी पाली की परीक्षा रद्द कर दी गई, जिसके बाद वहां उपस्थित अभ्यर्थियों ने जमकर विरोध किया। अभ्यर्थियों का आरोप था कि उन्हें परीक्षा रद्द होने की सूचना केंद्र पर पहुंचने के बाद ही मिली, जबकि आधिकारिक वेबसाइट पर कोई अपडेट नहीं दिया गया था। केंद्र पर लाउडस्पीकर से घोषणाएं तो की गईं, लेकिन वेबसाइट पर इसकी कोई जानकारी नहीं थी। इसी तरह कानपुर के एक केंद्र पर 800 से अधिक अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया गया, जबकि केंद्र की क्षमता केवल 399 अभ्यर्थियों की थी। इससे भीड़ बढ़ गई और अभ्यर्थियों ने जमकर विरोध किया। प्रयागराज के सुनीता सिंह सीता सिंह महिला महाविद्यालय स्थित आई-टेक जोन केंद्र पर भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली, जहां दूसरी और तीसरी पाली में लगभग 1,000 अभ्यर्थियों को बैठाया गया, जबकि केंद्र में केवल 650 कंप्यूटर थे। इससे अभ्यर्थियों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने सड़कों को भी रोक दिया।






