ड्रग्स के खिलाफ सरकारी मुहिम: कहां से भारत पहुंचता है नशा और कैसे किया जा सकता है इसका मुकाबला?

मुख्य बातें
- •भारत में नशीली दवाओं की तस्करी मुख्य रूप से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से होती है, जो पंजाब, राजस्थान, पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तर भारत तक पहुंचती है।
- •वर्ष 2022 में देश भर में ड्रग्स से संबंधित 8,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिसमें पंजाब, महाराष्ट्र और दिल्ली शीर्ष पर थे।
- •सरकार द्वारा NCB और राज्य पुलिस के माध्यम से सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई गई है तथा सोशल मीडिया और डार्क वेब पर नजर रखी जा रही है।
- •विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान जागरूकता अभियानों और तकनीकी उपकरणों के माध्यम से ही संभव है।
भारत में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे देश का युवा वर्ग गंभीर संकट का सामना कर रहा है। हाल ही में सरकार द्वारा नक्सलवादियों के सफाए के बाद अब ड्रग्स तस्करों पर भी कड़ी कार्यवाही का दौर शुरू किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में नशे की आपूर्ति के प्रमुख केंद्र पड़ोसी देशों से होते हुए भारत पहुंचते हैं, जहां से यह पूरे देश में फैल जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कई स्तरों पर प्रयास तेज कर दिए हैं।
देश में नशीली दवाओं की तस्करी मुख्य रूप से तीन प्रमुख मार्गों से होती है: पाकिस्तान के माध्यम से पंजाब और राजस्थान, बांग्लादेश से पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल, तथा अफगानिस्तान से उत्तर भारत। इन मार्गों के जरिए हेरोइन, अफीम, गांजा और अन्य नशीली वस्तुओं की आपूर्ति होती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, वर्ष 2022 में देश भर में ड्रग्स से संबंधित 8,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे, जिसमें पंजाब, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा घटनाएं सामने आईं।






