अल्बर्टा अलग देश बनेगा? कनाडा से अलगाव की मांग पर 19 अक्टूबर को होगा जनमत संग्रह

मुख्य बातें
- •अल्बर्टा प्रांत में 19 अक्टूबर 2024 को अलगाव पर जनमत संग्रह होगा।
- •अल्बर्टा कनाडा का प्रमुख तेल उत्पादक प्रांत है, जहाँ 1.65 लाख बिलियन बैरल तेल भंडार मौजूद है।
- •से चल रही अलगाव की मांग को अमेरिकी प्रशासन का भी समर्थन मिला था।
- •अलगाव के पक्ष में आने पर अल्बर्टा को अपना संविधान, कानून और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करनी होगी।
कनाडा के पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा में अलगाववाद की आग तेज़ हो गई है। यहाँ के निवासी लगातार ओटावा (कनाडा की राजधानी) से अलग होने की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में अल्बर्टा सरकार ने 19 अक्टूबर 2024 को एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह कराने का निर्णय लिया है। इस जनमत संग्रह के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि अल्बर्टा कनाडा का हिस्सा बना रहेगा अथवा एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उभरेगा। इस पूरे मामले ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि अगर अल्बर्टा अलग देश बनता है, तो यह फिलिस्तीन के बाद दुनिया के मानचित्र पर एक नए देश के तौर पर उभर सकता है।
अल्बर्टा कनाडा का एक प्रमुख प्रांत है, जो अपने विशाल तेल और प्राकृतिक गैस भंडारों के लिए जाना जाता है। ऑयल डेशबोर्ड के अनुसार, अल्बर्टा में लगभग 1.65 लाख बिलियन बैरल तेल भंडार मौजूद है, जो इसे कनाडा के सबसे धनी प्रांतों में से एक बनाता है। हालांकि, अल्बर्टा के निवासी लंबे समय से यह आरोप लगाते रहे हैं कि ओटावा सरकार उनकी आवाज़ को अनसुना कर रही है। 2018 में पहली बार अलगाव की मांग जोर पकड़ी थी, जब अल्बर्टा में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से आर्थिक असमानताओं को दूर करने के लिए थे। बाद में, अमेरिका ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया था। सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने अल्बर्टा के अलगाववादियों के साथ व्हाइट हाउस में बैठक की थी, जिसे कनाडा पर दबाव बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा गया था।






