संजय यादव पर क्या मंडरा रहा है राजनीतिक संकट? रोहिणी आचार्य के इस्तीफे से उठे सवाल
मुख्य बातें
- •रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने का लिया फैसला, कारण बताया व्यक्तिगत
- •संजय यादव पर पड़ सकता है सीधा असर, उनके राजनीतिक भविष्य पर उठे सवाल
- •आप पार्टी के प्रवक्ताओं ने मामले पर टिप्पणी करने से किया इनकार
- •विपक्षी दलों ने शुरू की इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश
- •रोहिणी क्षेत्र में आप पार्टी के भीतर पनप रहा था कुछ असंतोष
दिल्ली की राजनीति में हलचल मची हुई है। हाल ही में रोहिणी विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (आप) की विधायक रोहिणी आचार्य ने突然间 राजनीति छोड़ने का फैसला लिया है। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सीधा असर आप पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय यादव पर पड़ सकता है।
रोहिणी आचार्य, जो 2020 में पहली बार विधायक बनी थीं, ने अपने इस्तीफे का कारण व्यक्तिगत बताया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला कोई साधारण निर्णय नहीं है। सूत्रों के अनुसार, रोहिणी आचार्य के इस कदम से दिल्ली की राजनीति में नई हलचल शुरू हो सकती है। संजय यादव, जो आप पार्टी में एक प्रमुख चेहरा हैं, लंबे समय से रोहिणी क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हुए हैं। ऐसे में उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं।
आप पार्टी के प्रवक्ताओं ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं, विपक्षी दलों ने इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश शुरू कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रोहिणी आचार्य का इस्तीफा दिल्ली की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है। अगर संजय यादव को इस सीट से टिकट नहीं मिलता है, तो यह उनके राजनीतिक करियर के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
