संग्रहालय समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम: डॉ. खातुआ
मुख्य बातें
- •डॉ. रमेश खातुआ ने संग्रहालयों को समाज जोड़ने का सशक्त माध्यम बताया
- •संग्रहालय केवल वस्तुओं के संरक्षण का माध्यम नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत का जीवंत माध्यम भी हैं
- •संग्रहालयों में आयोजित कार्यक्रम समाज में ज्ञान वृद्धि और विचारों के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं
- •सरकार और समाज दोनों की भूमिका संग्रहालयों के संरक्षण और विकास में महत्वपूर्ण है
भारत में संग्रहालयों की भूमिका को लेकर वरिष्ठ इतिहासकार एवं संस्कृति अध्येता डॉ. रमेश खातुआ ने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए हैं। उनका कहना है कि संग्रहालय केवल ऐतिहासिक वस्तुओं के संरक्षण का माध्यम नहीं बल्कि समाज को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी हैं। उन्होंने बताया कि संग्रहालयों के माध्यम से लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकते हैं और राष्ट्रीय एकता को मजबूत कर सकते हैं।
डॉ. खातुआ ने उदाहरण देते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित संग्रहालय न केवल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होते हैं बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी ज्ञान और गौरव का स्रोत होते हैं। उन्होंने बताया कि संग्रहालयों में रखी गई वस्तुएं इतिहास की गवाही देती हैं और लोगों को अपने पूर्वजों की उपलब्धियों के बारे में जानकारी देती हैं। इससे समाज में गौरव और एकजुटता की भावना पैदा होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि संग्रहालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रम जैसे व्याख्यान, कार्यशालाएं और प्रदर्शनियां लोगों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का काम करती हैं। इससे न केवल लोगों की ज्ञान वृद्धि होती है बल्कि वे आपस में विचारों का आदान-प्रदान भी कर पाते हैं।
