सुमन कल्याणपुर: वह गायिका जिसे लता मंगेशकर जैसा सुर मिला, पर संगीतकारों ने कभी आजादी नहीं दी

मुख्य बातें
- •सुमन कल्याणपुर की आवाज़ में लता मंगेशकर जैसा सुर था, जिसके कारण उन्हें अक्सर लता का विकल्प माना जाता था।
- •उन्होंने मोहम्मद रफी और मुकेश जैसे दिग्गज गायकों के साथ लगभग डेढ़ सौ गाने गाए, जिनमें 'जिंदगी इम्तिहान लेती है' जैसे सदाबहार गीत शामिल हैं।
- •फिल्म 'नसीब' के गाने 'जिंदगी इम्तिहान लेती है' में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने सुमन, अनवर, और कमलेश अवस्थी को लता, रफी, और मुकेश की आवाज़ों के अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया।
- •सुमन कल्याणपुर को हमेशा लता के समान सुर मिलने के कारण उनकी पहचान बनाने में संघर्ष करना पड़ा, जबकि संगीतकारों ने उन्हें लता के विकल्प के रूप में ही मौका दिया।
हिन्दी फिल्मों के सुनहरे दौर में कई गायिकाओं ने अपनी आवाज़ से लोगों के दिलों पर राज किया, मगर कुछ ऐसी भी थीं जिन्हें लता मंगेशकर जैसे दिग्गज गायिका के समान सुर मिलने के बावजूद वह पहचान नहीं मिल सकी जो उनकी प्रतिभा की हकदार थी। ऐसी ही एक प्रतिभा थीं सुमन कल्याणपुर, जिनकी आवाज़ में लता मंगेशकर जैसा सुर था। यही कारण रहा कि उन्हें अक्सर लता का विकल्प माना जाता था। मगर उनकी नियति ही कुछ ऐसी थी कि उन्हें हमेशा अपने सुरों को लता की छाया से बाहर निकालने का मौका नहीं मिला।
सुमन कल्याणपुर ने अपने गायन करियर में कई सदाबहार गीत गाए, जिनमें उनके स्वर की खूबसूरती और मिठास सुनने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती थी। फिल्म 'दिल एक मंदिर' का गाना 'जूही की कली मेरी लाडली', 'नूर महल' का 'मेरे महबूब ना जा', 'राजकुमार' का 'आ जा आई बहार', और 80 के दशक की सुपरहिट फिल्म 'नसीब' का गाना 'जिंदगी इम्तिहान लेती है' जैसे गीतों ने उन्हें अमर बना दिया। इन गीतों को सुनते ही सुनने वाले के मन में यह सवाल उठता था कि क्या यह गीत लता मंगेशकर की आवाज़ है या फिर सुमन कल्याणपुर की। उनके स्वर में इतनी समानता थी कि संगीत के पारखी भी मुश्किल से अंतर कर पाते थे।






