रूस-तालिबान रक्षा समझौते की पूरी डिटेल: क्या मिलेंगे पुराने हथियारों के मरम्मत के अलावा नए?

मुख्य बातें
- •रूस और तालिबान ने 30 मई को रक्षा समझौता किया, जिसमें फिलहाल पुराने सोवियत हथियारों की मरम्मत पर जोर दिया गया है।
- •तालिबान के पास T-55, T-62 टैंक, BMP-1/2 बख्तरबंद वाहन, Mi-17/24 हेलिकॉप्टर और बड़ी संख्या में PKM मशीन गनें मौजूद हैं।
- •सोवियत संघ के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद बचे हथियारों पर तालिबान ने 1990 के दशक में कब्जा किया था।
- •तालिबान के रक्षा मंत्री ने कहा है कि वे अफगानिस्तान पर किसी भी हमले को रोकने के लिए अपनी रक्षा प्रणाली को मजबूत कर रहे हैं।
मॉस्को, 30 मई को हुए एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते के बाद रूस और तालिबान के बीच हथियारों से जुड़े नए समझौते की पूरी डिटेल सामने आ गई है। रूस के अफगानिस्तान मामलों के विशेष दूत जमीर काबुलोव ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल तालिबान को नए हथियार नहीं दिए जाएंगे। उनका कहना है कि रूस केवल उन पुराने सोवियत युग के हथियारों की मरम्मत करेगा, जो तालिबान के पास पहले से मौजूद हैं। इस मरम्मत से तालिबान की सैन्य क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है। काबुलोव ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि भविष्य में तालिबान को नए हथियार भी मुहैया कराए जा सकते हैं, लेकिन फिलहाल पुराने हथियारों को ही संचालन योग्य बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
तालिबान के पास मौजूद सोवियत युग के हथियारों की उत्पत्ति का इतिहास भी काफी पुराना है। 1990 से पहले अफगानिस्तान पर सोवियत संघ का नियंत्रण था। 1979 में तालिबान के लड़ाकों ने अफगानिस्तान सरकार और सोवियत शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसके बाद 1989 में सोवियत संघ ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला लिया। जब सोवियत संघ वापस गया, तो अफगानिस्तान सरकार के पास बड़ी संख्या में रूसी हथियार बच गए, जो बाद में तालिबान के नियंत्रण में आ गए।
