रुपये में गिरावट के पीछे कच्चे तेल के बजाय SIP और FII की बिकवाली! जेफरीज की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

मुख्य बातें
- •जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार रुपये में गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतें नहीं, बल्कि SIP और FII की बिकवाली है।
- •रुपये की विनिमय दर वर्तमान में लगभग 83.50 प्रति डॉलर है, जो पिछले महीनों में लगभग 2% गिर चुकी है।
- •म्यूचुअल फंड्स के माध्यम से निवेश में कमी और विदेशी निवेशकों द्वारा निकासी के कारण रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।
- •भारतीय रिजर्व बैंक को रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
नई दिल्ली: भारतीय रुपये में हालिया गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को जिम्मेदार ठहराने का चलन रहा है, लेकिन वैश्विक निवेश बैंक जेफरीज (Jefferies) ने अपनी एक ताज़ा रिपोर्ट में इस धारणा को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि रुपये की कमज़ोरी का मुख्य कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में वृद्धि नहीं है, बल्कि घरेलू और विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली (सेलिंग) का दबाव है।
जेफरीज ने अपने विश्लेषण में बताया है कि SIP (Systematic Investment Plan) और FII (Foreign Institutional Investors) द्वारा की जा रही बिकवाली रुपये पर भारी पड़ रही है। विशेष रूप से, म्यूचुअल फंड्स के माध्यम से किए जाने वाले निवेश में कमी और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाज़ारों से धन निकासी के कारण रुपये में दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर के मज़बूत होने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण भी रुपये पर दबाव देखा जा रहा है।






