थरूर बोले- पूरा 'वंदे मातरम' गाना बोझिल, आधिकारिक कार्यक्रमों में इसकी अनिवार्यता पर उठाया सवाल

मुख्य बातें
- •कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरा 'वंदे मातरम' गाने की अनिवार्यता पर उठाया सवाल।
- •थरूर का कहना है कि पूरा गीत गाना लोगों पर बोझिल हो सकता है और इसकी जरूरत नहीं।
- •'वंदे मातरम' को लेकर लंबे समय से चल रहा है विवाद, कुछ समूह मानते हैं इसके शब्द अपमानजनक।
- •राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किए जाने के बावजूद इस पर राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी।
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने देश के आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरा 'वंदे मातरम' गाया जाना बोझिल और अनावश्यक बताया है। थरूर ने कहा कि किसी भी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के लिए पूरा गीत गाना अत्यधिक दबाव वाला हो सकता है। उनका यह बयान उस बहस को फिर से हवा दे रहा है, जिसमें राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं।
थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्हें 'वंदे मातरम' से कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। बल्कि उनका कहना है कि इस गीत को पूरी तरह से गाना हर किसी के लिए संभव नहीं होता। उन्होंने उदाहरण दिया कि कई लोग ऐसे हो सकते हैं जिन्हें गीत के शब्दों या भावार्थ की पूरी समझ नहीं है। ऐसे में उन्हें पूरा गाना मजबूरी लग सकती है। उनका मानना है कि राष्ट्रीय भावना को व्यक्त करने के कई तरीके हो सकते हैं, जिनमें पूरा गीत गाना अनिवार्य नहीं होना चाहिए।






