कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैया का राजनीतिक सफर: जाति से परे नेतृत्व!
मुख्य बातें
- •सिद्धरामैया का जन्म 1947 में हुआ था, वे एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। - उन्होंने 1983 में कांग्रेस पार्टी में शामिल होकर राजनीतिक यात्रा शुरू की। - 2004-2006 और 2013-2018 के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। - विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर फिर से मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला।
कर्नाटक की राजनीति में लंबे अनुभव वाले नेता सिद्धरामैया, जाति आधारित राजनीति से परे एक ऊंचे नेता के रूप में उभरे हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने वाले सिद्धरामैया ने कई दशकों से पार्टी में काम किया है। 1983 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए सिद्धरामैया ने शुरुआत में किसानों और पिछड़े वर्ग के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। सिद्धरामैया का जन्म 1947 में हुआ था। उनके पिता सीनीवासप्पा एक किसान थे। ग्रामीण क्षेत्र में प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने वाले सिद्धरामैया ने बाद में कानून की पढ़ाई की। राजनीतिक जीवन में कई ऊंचाइयों को छूने वाले सिद्धरामैया 1983 में पहली बार विधानसभा सदस्य के रूप में चुने गए थे। बाद में कई बार विधानसभा के लिए चुने गए। 2004-2006 और 2013-2018 के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। उनके दूसरे कार्यकाल में कई सामाजिक कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गईं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों के लिए सहायता प्रदान करने वाली योजनाएं प्रमुख थीं। सिद्धरामैया के नेतृत्व में कर्नाटक कांग्रेस पार्टी 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर फिर से सत्ता में आई। उनके नेतृत्व में पार्टी ने विभिन्न समुदायों को एकजुट करके जीत हासिल की। भविष्य में कर्नाटक के विकास के लिए कई नए कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है।
