8वें वेतन आयोग की चर्चाओं में OPS और NPS की दोहरी कहानी, जानें क्या है मामला

मुख्य बातें
- •OPS को वापस लाना अब शायद उतना आसान न हो क्योंकि NPS को लागू हुए लगभग दो दशक बीत चुके हैं और इस दौरान कर्मचारियों और सरकार के योगदान से सिस्टम में 16.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा हो चुकी है।
- •OPS को वापस लाने के लिए सरकार को अचानक बाजार से 16.5 लाख करोड़ रुपये की रकम निकालनी होगी, जिससे स्टॉक मार्केट और बॉन्ड मार्केट में भारी उथल-पुथल मच जाएगी।
- •OPS में पेंशन के नाम पर सैलरी से एक रुपया नहीं काटा जाता, जबकि NPS में कर्मचारियों को अपनी बेसिक सैलरी में से हर महीने 10 परसेंट पेंशन फंड में जमा कराना पड़ता है।
- •OPS में सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ता (DA- Dearness Allowances) बढ़ाती है, जबकि NPS में ऐसा कुछ नहीं है।
8वें वेतन आयोग की चर्चाओं में OPS और NPS की दोहरी कहानी सामने आ रही है। सरकारी कर्मचारी यूनियनों ने सालों से OPS को बहाल करने की मांग की है, लेकिन अब कर्मचारियों के प्रतिनिधि भी यह मानने लगे हैं कि NPS को पूरी तरह से खत्म करना अब शायद उतना आसान न हो।
दरअसल, NPS को लागू हुए लगभग दो दशक बीत चुके हैं और इस दौरान कर्मचारियों और सरकार के योगदान से सिस्टम में 16.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा हो चुकी है। यह पैसा LIC, SBI, UTI जैसे सरकारी वित्तीय संस्थानों के माध्यम से शेयर बाजार, सरकारी बॉन्ड और विभिन्न कॉर्पोरेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेशित है। ऐसे में अगर सरकार पूरी तरह से OPS पर लौटती है, तो इस विशाल धनराशि को अचानक बाजार से निकालना होगा। इससे स्टॉक मार्केट और बॉन्ड मार्केट में भारी उथल-पुथल मच जाएगी। ऊपर से लिक्विडिटी का संकट गहराने का खतरा भी है।






