भारतीय उपभोक्ताओं का खर्च बदल रहा है: अब अनुभव और सुविधा पर ज्यादा जोर, प्रीमियम वस्तुओं की बढ़ी मांग

मुख्य बातें
- •भारत में उपभोक्ताओं का खर्च अब अनुभव, सुविधा और प्रीमियम उत्पादों पर केंद्रित हो रहा है, न कि केवल आवश्यक वस्तुओं पर।
- •लाइव इवेंट्स, ओटीटी प्लेटफार्म, प्रीमियम स्मार्टफोन और विदेश यात्रा जैसी चीजों पर खर्च में तेजी से वृद्धि हुई है।
- •एपल जैसी कंपनियों का भारत में कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, जबकि पारंपरिक उपभोक्ता उत्पादों की वृद्धि धीमी रही है।
- •बढ़ती महंगाई, किराया और ईएमआई के बोझ के कारण लोगों की बचत और खर्च करने की क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है।
भारत में उपभोक्ताओं के खर्च करने के तरीके में तेजी से बदलाव हो रहा है। अब लोग केवल आवश्यक वस्तुओं जैसे राशन, टीवी, फ्रिज या दोपहिया वाहनों पर ही ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे, बल्कि डिजिटल सेवाओं, प्रीमियम मोबाइल फोन, ओटीटी प्लेटफार्म, विदेश यात्रा और बेहतर जीवनशैली पर अधिक पैसा खर्च कर रहे हैं। कोटक म्यूचुअल फंड द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट 'द ग्रेट कंजम्पशन शिफ्ट' के अनुसार, भारत का बाजार अब जरूरत से ज्यादा अनुभव और सुविधा आधारित होता जा रहा है। इससे देश के उपभोग पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
पहले लोग अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा एफएमसीजी उत्पादों, घरेलू उपकरणों, दोपहिया वाहनों और घरेलू यात्रा पर खर्च करते थे। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। लोग अब अनुभवों पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। इसमें लाइव इवेंट्स, डिजिटल मनोरंजन, ओटीटी प्लेटफार्म, गेमिंग, प्रीमियम गैजेट्स और ऑनलाइन सेवाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, देश में टिकट वाले लाइव इवेंट्स की संख्या 2022 में लगभग 19 हजार थी, जो 2025 तक बढ़कर 34 हजार पहुंचने का अनुमान है। इस उद्योग का बाजार आकार अब 20,861 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इससे साफ है कि लोग अब केवल सामान खरीदने के बजाय अनुभव खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।






