पूर्णिया से फैला संगठित ‘बकरी माफिया’, लाखों का अवैध कारोबार, लक्जरी गाड़ियों से चलता है धंधा

मुख्य बातें
- •पूर्णिया समेत सीमांचल में संगठित ‘बकरी माफिया’ सक्रिय, हर महीने करीब 50 लाख रुपये का अवैध कारोबार।
- •गिरोह लक्जरी गाड़ियों जैसे फॉर्च्यूनर, क्रेटा, स्कॉर्पियो, हुंडई SUV का इस्तेमाल करता है।
- •चोरी की गई बकरियां पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सुपौल और सहरसा के मीट दुकानों तक पहुंचाई जाती हैं।
- •पुलिस के लिए सबूत जुटाना मुश्किल, अधिकतर मामलों में शिकायत दर्ज नहीं होती।
बिहार के पूर्णिया समेत सीमांचल और कोसी क्षेत्र में इन दिनों एक अत्यंत संगठित और हाईटेक ‘बकरी माफिया’ का नेटवर्क सक्रिय हो गया है। यह साधारण पशु चोरी नहीं, बल्कि लाखों रुपये के अवैध कारोबार का हिस्सा है, जिसमें लक्जरी गाड़ियों जैसे फॉर्च्यूनर, क्रेटा, स्कॉर्पियो, हुंडई SUV आदि का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में सक्रिय यह गिरोह हर महीने लगभग 50 लाख रुपये कमाने का दावा किया जा रहा है।
इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए चमचमाती गाड़ियां गांव की गलियों में पहुंचती हैं और कुछ ही सेकंड में घरों के बाहर बंधी बकरियां उठाकर ले जाती हैं। यह गिरोह पूर्णिया के बनमनखी और के.नगर थाना क्षेत्र सहित 7-8 जिलों में फैला हुआ है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दर्जनों युवक इस गिरोह से जुड़े हुए हैं, जो सुबह गाड़ियों में निकलते हैं, गांवों में रेकी करते हैं, और शाम तक चोरी की गई बकरियों को पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सुपौल और सहरसा के चिन्हित मीट दुकानों तक पहुंचा देते हैं। यहां कुछ ही मिनटों में बकरियों को काटकर मांस के रूप में बेच दिया जाता है, जिससे पुलिस के लिए सबूत जुटाना मुश्किल हो जाता है।






