सूर्य ग्रहण में सूतक काल का महत्व: जानिए नियम, समय और 12 अगस्त के ग्रहण पर प्रभाव

मुख्य बातें
- •सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पहले सूर्य ग्रहण में और 9 घंटे पहले चंद्र ग्रहण में शुरू होता है।
- •अगस्त 2024 को लगने वाले सूर्य ग्रहण का सूतक काल रात 7 बजकर 12 मिनट से शुरू होगा।
- •सूतक काल के दौरान शुभ कार्य, भोजन पकाने और ग्रहण को नंगी आंखों से देखने से परहेज किया जाता है।
- •ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान और विशेष पूजा के बाद सूतक काल समाप्त होता है।
हिंदू धर्म में ग्रहण से जुड़े कई नियम और परंपराएं प्रचलित हैं, जिनमें सूतक काल का विशेष महत्व है। सूतक काल वह अवधि होती है, जो ग्रहण शुरू होने से पहले और उसके बाद तक चलती है। इस दौरान शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। आइए जानते हैं सूतक काल क्या होता है, इसके नियम क्या हैं और 12 अगस्त 2024 को लगने वाले साल के दूसरे सूर्य ग्रहण में सूतक काल लागू होगा या नहीं।
सूतक काल मुख्य रूप से ग्रहण के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है, जबकि चंद्र ग्रहण के दौरान यह 9 घंटे पहले आरंभ होता है। इस अवधि में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, और लोग पूजा-पाठ से परहेज करते हैं। सूतक काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।






