कम उम्र में ही पित्ताशय की पथरी का खतरा: कारण, लक्षण और बचाव के तरीके

मुख्य बातें
- •सामान्य जनसंख्या में लगभग 7 प्रतिशत लोगों को गॉल ब्लैडर में पथरी की समस्या होती है।
- •पित्ताशय की पथरी मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल स्टोन और पिगमेंट स्टोन दो प्रकार की होती है।
- •कम पानी पीना, ऑयली भोजन, अपर्याप्त फाइबर और तेजी से वजन घटाने से पथरी का खतरा बढ़ता है।
- •पर्याप्त पानी पीना, फाइबर युक्त आहार, नियमित भोजन और तले-भुने खाद्य पदार्थों से परहेज करके पथरी से बचा जा सकता है।
भारत में तेजी से बढ़ती अस्वस्थ जीवनशैली और खान-पान की आदतों के कारण कम उम्र के लोगों में पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) की पथरी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों में किडनी स्टोन की तुलना में गॉल ब्लैडर की पथरी अधिक परेशान कर रही है। सर गंगाराम अस्पताल के लिवर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के उपाध्यक्ष डॉ. पीयूष रंजन बताते हैं कि सामान्य जनसंख्या में लगभग 7 प्रतिशत लोगों को गॉल स्टोन की समस्या होती है। हालांकि यह समस्या आम हो गई है, लेकिन चिंता की बात यह है कि अब कम उम्र के लोग भी तेजी से इसके शिकार हो रहे हैं।
गॉल ब्लैडर में पथरी होने पर पेट के मध्य और दाहिनी तरफ तेज दर्द होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पित्ताशय की पथरी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है: कोलेस्ट्रॉल स्टोन और पिगमेंट स्टोन। कोलेस्ट्रॉल स्टोन शरीर में कोलेस्ट्रॉल के असंतुलित चयापचय या पित्ताशय की आंतरिक परत में दोष के कारण होता है। वहीं, पिगमेंट स्टोन रक्त कोशिकाओं के टूटने (हीमोलिसिस) के कारण बनते हैं। कम उम्र में ज्यादातर पिगमेंट स्टोन ही होते हैं, जो छोटे और काले रंग के होते हैं। कोलेस्ट्रॉल स्टोन आमतौर पर तब होता है जब किसी व्यक्ति को मेटाबोलिक समस्याएं होती हैं।






