जबलपुर के कुलोन गांव में 7 साल से अधूरी रही पानी की टंकी: गुणवत्ता पर उठे सवाल, भ्रष्टाचार का आरोप

मुख्य बातें
- •जबलपुर के कुलोन गांव में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी पहली बार भरते ही फूट गई, जिससे गुणवत्ता पर सवाल उठे। - करीब सात साल तक निर्माणाधीन रहने के बाद टंकी में तकनीकी खामियां सामने आईं, जिससे पानी का भारी रिसाव हुआ। - ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार हुआ और ठेकेदारों द्वारा काम अधूरा छोड़ दिया गया। - कलेक्टर ने जांच दल गठित किया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित कुलोन गांव में जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई पानी की टंकी गुणवत्ता के गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। करीब सात साल तक निर्माणाधीन रहने के बाद जब पहली बार इस टंकी में पानी भरा गया, तो उसकी दीवारों और संरचना से जगह-जगह पानी का रिसाव शुरू हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस टंकी में तकनीकी खामियां हैं, जो भ्रष्टाचार का परिणाम है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि टंकी के पास बने एक मकान में पानी भर गया और पूरा घर जलमग्न हो गया। इसके बाद प्रशासन द्वारा टंकी में सीमेंट का घोल भरकर मरम्मत करने की कोशिश की जा रही है। गाँव के निवासी भैरव सिंह ठाकुर ने बताया कि टंकी में पानी रुकता ही नहीं है। सुबह भरा गया पानी शाम तक और रात में भरा गया पानी सुबह तक खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि टंकी का निर्माण ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए किया गया था, लेकिन इसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। निर्माण कार्य के दौरान कई बार ठेकेदार बदले गए, जिसके कारण काम अधूरा रह गया। भैरव सिंह ठाकुर के अनुसार, यह टंकी करीब पांच से छह साल में बनकर तैयार हुई, लेकिन तैयार होने के बाद भी इसमें तकनीकी खामियां बनी हुई हैं। वर्तमान में गांव में पानी की आपूर्ति मोटरों के सहारे हो रही है, और बिजली जाने पर पूरे गांव में पानी की समस्या खड़ी हो जाती है। गाँव के पूर्व सरपंच रमेश पटेल ने बताया कि टंकी का निर्माण कार्य पिछले छह-सात साल से चल रहा था। इस दौरान कई ठेकेदार बदले गए। उन्होंने बताया कि जब टंकी चालू हुई तो एक परिवार के मकान में इतना पानी भर गया कि पूरा घर जलमग्न हो गया। उन्होंने बताया कि टंकी बनने में करीब एक साल हो गया है, लेकिन इसका निर्माण कार्य छह-सात साल से चल रहा था। कभी कोई ठेकेदार एक महीना काम करता और चला जाता, फिर छह महीने बाद दूसरा आता और दो महीने काम करके छोड़ देता। इसी तरह काम चलता रहा। बरगी विधानसभा के कांग्रेस के पूर्व विधायक संजय यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह टंकी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में कार्य प्रारंभ हुआ था और 2022 तक प्रत्येक गांव में घर-घर नर्मदा जल पहुंचाना था, लेकिन आज स्थिति बेहद खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि नर्मदा किनारे रहने के बावजूद वर्ष 2026 आ गया है और लोग अब भी पानी के लिए परेशान हैं। जबलपुर के कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच दल का गठन किया है। उन्होंने बताया कि जांच में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ-साथ कार्यपालन स्तर के अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के लिए स्थानीय इंजीनियरिंग कॉलेज से सैंपल लेकर परीक्षण कराया जाएगा। यदि जांच में गुणवत्ता से समझौता पाया जाता है तो संबंधित विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्र में बनी सभी पानी की टंकियों की चरणबद्ध जांच कराई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी या निर्माण संबंधी लापरवाही का पता लगाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल पेयजल आपूर्ति की कोई व्यापक समस्या नहीं है, लेकिन कुछ स्थानों पर टंकियां अभी संचालन में नहीं हैं या परीक्षण चरण में हैं।
