भारत-नेपाल सीमा विवाद: विदेश मंत्रालय ने कहा, 'तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं'

मुख्य बातें
- •भारत-नेपाल सीमा विवाद पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह द्विपक्षीय मामला है और इसमें तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।
- •भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित हो चुका है, जबकि 2 प्रतिशत हिस्सा अभी भी विवादित है।
- •नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा था कि दोनों देशों ने एक-दूसरे की जमीन पर कब्जा किया हुआ है।
- •गंडक नदी के मार्ग बदलने और सीमा पर अतिक्रमण के कारण भी विवाद उत्पन्न हुआ है।
नई दिल्ली, 3 जून 2026 भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर भारत सरकार ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह से द्विपक्षीय है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने सीमा संबंधी सभी मुद्दों के समाधान के लिए पहले ही द्विपक्षीय तंत्र स्थापित कर रखा है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित किया जा चुका है, जबकि शेष 2 प्रतिशत हिस्से पर अभी भी विवाद बना हुआ है। प्रवक्ता जायसवाल ने बताया कि इन अनसुलझे क्षेत्रों में सीमा पार कब्जे और 'नो मैन्स लैंड' (किसी के अधिकार क्षेत्र में न आने वाली जमीन) पर अतिक्रमण के मामले सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि इन विवादित क्षेत्रों की संयुक्त रूप से मैपिंग की जा रही है ताकि वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके।






