गर्मियों में कार खरीदते समय रंग का चुनाव क्यों है ज़रूरी? जानिए सफेद और काली कार में कौन ज्यादा गर्म होती है

मुख्य बातें
- •गर्मियों में कार का रंग चुनाव महत्वपूर्ण है क्योंकि अलग-अलग रंग सूरज की गर्मी को अलग तरीके से अवशोषित और परावर्तित करते हैं।
- •काली कारें सूरज की रोशनी को ज्यादा अवशोषित करती हैं, जिससे वे बाहरी तौर पर ज्यादा गर्म हो जाती हैं, जबकि सफेद कारें गर्मी को परावर्तित कर देती हैं।
- •कार के अंदर का तापमान सिर्फ बाहरी रंग पर निर्भर नहीं करता; इंटीरियर सामग्री, डैशबोर्ड और शीशों से आने वाली गर्मी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- •विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कार को छांव में खड़ा करना, विंडशील्ड सन कवर और रिफ्लेक्टिव शेड्स का उपयोग गर्मी कम करने के प्रभावी तरीके हैं।
गर्मियों के मौसम में भारत के कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में कार के अंदर बैठना काफी मुश्किल हो जाता है, खासकर तब जब कार में एसी न हो। कार खरीदते समय लोग आमतौर पर डिजाइन, फीचर्स और कीमत पर ध्यान देते हैं, लेकिन गर्मी के मौसम में कार के रंग का चुनाव भी महत्वपूर्ण हो जाता है। खासकर काले और सफेद रंग की कारों की तुलना हमेशा चर्चा में रहती है। लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या सफेद कार के मुकाबले काली रंग की कार अंदर से ज्यादा गर्म होती है?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो काले रंग की कारें सूरज की रोशनी और गर्मी को अधिक अवशोषित करती हैं। जब कार सीधे धूप में खड़ी रहती है, तो काले रंग की सतह ज्यादा ऊर्जा सोख लेती है। यही कारण है कि काली कार की बाहरी बॉडी सफेद कार की तुलना में अधिक गर्म महसूस होती है। दूसरी ओर, सफेद रंग सूरज की किरणों का बड़ा हिस्सा वापस परावर्तित कर देता है, जिससे कार की सतह पर कम गर्मी जमा होती है। इसी कारण गर्म इलाकों में सफेद कारें काफी लोकप्रिय मानी जाती हैं।






