पूर्व पति/पत्नी से मिलना गुनाह नहीं, मगर पत्नी के झूठे आरोप पर मिला तलाक: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

मुख्य बातें
- •पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के बाद पूर्व पति या पत्नी से एक बार मिलना व्यभिचार नहीं है। - न्यायालय ने माना कि पत्नी द्वारा अपने परिवार पर झूठे आरोप लगाना मानसिक क्रूरता है। - न्यायालय ने पत्नी के निराधार आरोपों के कारण पति को तलाक की मंजूरी दी। - न्यायालय ने कहा कि विवाह के बाद पूर्व साथी से मिलना गुनाह नहीं है, लेकिन झूठे आरोप लगाना वैवाहिक जीवन के लिए हानिकारक है।
चंडीगढ़, 18 जुलाई — पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शादी के बाद पूर्व पति या पत्नी से एक बार मिलना व्यभिचार की श्रेणी में नहीं आता। न्यायालय ने कहा कि ऐसा करना गुनाह नहीं है। हालांकि, न्यायालय ने एक मामले में पत्नी द्वारा अपने परिवार पर झूठे आरोप लगाने को मानसिक क्रूरता मानते हुए तलाक की मंजूरी दे दी। अदालत ने कहा कि अगर पति-पत्नी में से कोई एक पूर्व साथी से मिलता है, तो यह जरूरी नहीं कि इसे व्यभिचार माना जाए। महत्वपूर्ण यह है कि इस तरह के मिलन का उद्देश्य क्या है और इसका वैवाहिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अगर ऐसा मिलन शादी के बाद हुआ है और इसका उद्देश्य दोबारा संबंध बनाना नहीं है, तो इसे व्यभिचार नहीं माना जा सकता। इस मामले में पत्नी ने अपने पति पर आरोप लगाया था कि वह अपनी पूर्व पत्नी से मिल रहा है। पत्नी ने अपने परिवार के सदस्यों पर भी झूठे आरोप लगाए थे। न्यायालय ने पाया कि पत्नी के आरोप निराधार और मनगढ़ंत थे। इससे पति के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा। न्यायालय ने इसे मानसिक क्रूरता की श्रेणी में रखते हुए पति के पक्ष में फैसला सुनाया और तलाक की मंजूरी दे दी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि विवाह के बाद पूर्व साथी से मिलना व्यभिचार नहीं है, लेकिन परिवार के सदस्यों पर निराधार आरोप लगाना वैवाहिक जीवन के लिए हानिकारक हो सकता है। न्यायालय ने कहा कि इस तरह के आरोप लगाने से वैवाहिक संबंधों में विश्वास की कमी आती है और इससे वैवाहिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
