यूपी में बिजली बिलों का 10% फ्यूल सरचार्ज विवाद: UPERC ने UPPCL से 7 दिन में जवाब तलब, 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद

मुख्य बातें
- •उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने UPPCL द्वारा लगाए गए 10% फ्यूल सरचार्ज को नियमों के विरुद्ध माना है।
- •उपभोक्ता परिषद के अनुसार, UPPCL ने फ्यूल सरचार्ज की गणना में 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाया को भी शामिल कर लिया था, जिससे उपभोक्ताओं पर 1610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
- •UPERC ने UPPCL से 7 दिन में जवाब तलब किया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- •प्रदेश के 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को UPERC के फैसले से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को अपने बिजली बिलों में जोड़े गए 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) से राहत मिल सकती है। दरअसल, उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) से सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने प्रारंभिक जांच में पाया है कि UPPCL द्वारा जून 2026 के बिलों में लगाया गया यह अतिरिक्त शुल्क नियामक नियमों के अनुसार उचित नहीं है।
इस पूरे मामले की शुरुआत उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की ओर से उठाए गए आरोपों से हुई है। परिषद का आरोप है कि UPPCL ने फ्यूल सरचार्ज की गणना करते समय मार्च 2026 की बिजली खरीद लागत के अलावा लगभग 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाया और पिछले समय के खर्चों को भी शामिल कर लिया था। परिषद के अनुसार, ऐसा करना नियामक नियमों के खिलाफ है। उनका दावा है कि यदि सही तरीके से गणना की जाती, तो उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त बोझ डालने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके बजाय, जून 2026 में बिजली दरों में लगभग 2 प्रतिशत की कमी हो सकती थी।






