विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: जानिए इस दुर्लभ व्रत की तिथि, पूजा विधि और महत्व

मुख्य बातें
- •विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 3 जून को मनाई जाएगी, जो अधिकमास के दौरान पड़ रही है और लगभग तीन वर्ष में एक बार ही आती है।
- •चतुर्थी तिथि 3 जून रात 9:22 बजे से 4 जून रात 11:30 बजे तक रहेगी, लेकिन व्रत का मुख्य अनुष्ठान 3 जून रात को चंद्र दर्शन और अर्घ्यदान के साथ होगा।
- •चंद्रोदय रात 10:04 बजे होगा और चंद्र अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त रात 10:04 से 10:43 बजे तक रहेगा, जिसमें चंद्रदेव को कच्चे दूध मिले जल से अर्घ्य देना चाहिए।
- •पूजा विधि में सुबह स्नान, गणेश पूजा, मंत्र जाप, चंद्र अर्घ्य और आरती शामिल हैं; ‘विभुवन पालक’ गणेश स्वरूप की आराधना से तीनों लोकों की रक्षा होती है।
हिन्दू धर्म में भगवान गणेश की आराधना का विशेष महत्व है, और संकष्टी चतुर्थी का व्रत तो भक्तों के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। साल 2026 में पड़ने वाली ‘विभुवन संकष्टी चतुर्थी’ न केवल बेहद खास है, बल्कि यह दुर्लभ संयोग भी है। दरअसल, यह चतुर्थी सामान्य दिनों में नहीं, बल्कि लगभग हर तीन वर्ष में आने वाले अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से जीवन के सभी संकटों का निवारण होता है और भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है।
पंचांग के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी 2026 की तिथि 3 जून की रात 9 बजकर 22 मिनट से प्रारंभ होकर 4 जून की रात 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। हालांकि, इस व्रत में चंद्र दर्शन और अर्घ्यदान का विशेष महत्व है। चूंकि चतुर्थी तिथि 3 जून की रात तक विद्यमान रहेगी, इसलिए इस दुर्लभ व्रत का पालन 3 जून 2026 को किया जाएगा। चंद्रोदय का समय रात 10 बजकर 4 मिनट है, और चंद्रमा को अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त रात 10:04 बजे से 10:43 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान चंद्रदेव को जल में कच्चा दूध मिलाकर अर्घ्य देने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान गणेश की कृपा सदैव बनी रहती है।






